क्या है DeepSeek! जिसके V3 और R1 AI ने डिजिटल दुनियां में मचा दिया है तहलका
डीपसीक- जिसने मचा दिया है एआई की दुनिया में तहलका.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में चीन की एक कंपनी डीपसीक चर्चा में है.
डीपसीक की चर्चा का मुख्य कारण है इसके लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) वी3 और आर1.
जो चैटबोट के माध्यम से अपने ग्राहकों को AI सेवा देते है.
डीपसीक के दोनों चैटबोट LLM वी3 और आर1 को गुणवत्ता और लागत के मामले में अमेरिकी कंपनियों जैसे- ओपनएआई के चैटGPT, माइक्रोसोफ्ट के कोपायलट, मेटा के लिआमा और गूगल के जैमिनी से भी बहतर बताया जा रहा है.
आइये जानते है डीपसीक और इसके नए चैटबोट के बारे में..
क्या है डीपसीक?
डीपसीक चीन के दक्षिण-पूर्वी शहर हांगचो में स्थित है। मार्किट इंटेलिजेंस प्लेटफोर्म सेंसर टावर के अनुसार, डीपसीक की स्थापना जुलाई 2023 में हुई थी। डीपसीक के संस्थापक लिआंग वेनफेंग है। लिआंग वेनफेंग ने हेज फंड के माध्यम से पैसा एकत्रित करके डीपसीक की शुरुआत की थी।
वेनफेंग एक इन्फोर्मेशन एंड इलेक्ट्रोनिक इंजिनियर है, और वो हेज फंड मैनेजर भी रह चुके है।
क्या है डीपसीक का वी3 और आर1 ?
वी3 और आर1 डीपसीक के LLM मॉडल है। वी3 को दिसंबर 2024 में और आर1 को 10 जनवरी 2025 में लांच किया गया था।
इस समय आर1 की चर्चा हो रही है उसकी कम लागत और दक्षता के कारण। डीपसीक का कहना है कि उसने आर1 को तैयार करने और प्रशिक्षित करने में केवल 60 लाख डॉलर यानि करीब 52 करोड़ भारतीय रूपये की राशी खर्च की है। जबकि ओपनएआई, माइक्रोसोफ्ट, मेटा और गूगल जैसे अन्य कंपनियों ने अपने चैटबोट तैयार करने में अरबो डॉलर खर्च किये है।
ओपनएआई से काफी कम है डीपसीक आर1 का शुल्क।
ओपनएआई का 01 मॉडल इस्तेमाल करने का शुल्क 15 डॉलर प्रति 10 लाख इनपुट टोकन है। वहीँ, डीपसीक के आर1 का प्रति 10 लाख इनपुट टोकन शुल्क मात्र 0.55 डॉलर है।
किसी भी LLM को अपनी प्रक्रिया पूरी करने के लिए शब्दों, अक्षरों के सेट, विराम चिन्ह और वाक्यों आदि की जरूरत होती है। जब हम चैटबोट से लिखित रूप में कुछ पूछते है तो वह हमारे लिखे हुए वाक्यों को छोटी-छोटी इकाईयों में बाँट देता है। इसको ही टोकन कहा जाता है।
मात्र दो हजार चिपों से बना है डीपसीक का चैटबोट।
डीपसीक के इंजीनियर्स का कहना है कि उन्होंने केवल एनवीडिया की दो हजार चिप से ही अपना चैटबोट तैयार किया है। डीपसीक ने वर्ष 2021 में एनवीडिया से हजारो चिप खरीदी थी।
डीपसीक का एआई एक ओपन सोर्स मॉडल है। यानि कोई भी इसके आधार पर अपना एआई बना सकता है। वहीँ, अमेरिका कंपनियों के एआई ओपन-सोर्स टेक्नोलोजी पर आधारित नहीं है। अमेरिकी कंपनियों का कहना है कि ओपन-सोर्स होने से कोई भी एआई के माध्यम से गलत और भ्रामक सूचनाओं का प्रचार कर सकता है।
कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिकी रेग्युलेटर ओपन-सोर्स टेक्नोलोजी की प्रगति को रोकते है तो चीन को एआई के प्रसार में महत्वपूर्ण बढ़त मिल जाएगी।
डीपसीक ओपन एआई के लिए खतरा क्यूँ है?
ओपनएआई ने महंगे हार्डवेयर का इस्तेमाल करके अपना एआई मॉडल चैटGPT बनाया है, जबकि डीपसीक महंगे हार्डवेयर पर निर्भर नहीं है। डीपसीक के आर1 को चैटGPT से बेहतर बताया जा रहा है. ओपनAI में चार हजार से अधिक कर्मचारी है, जबकि डीपसीक ने अपने 200 कर्मचारियों की टीम से ही तकनीक की दुनिया में तहलका मचाने वाला AI उत्पाद बना डाला।
डीपसीक के आने के बाद ओपनAI ने 01 मॉडल लांच किया है। डीपसीक के चैटबोट सभी के लिए उपलब्ध है, जबकि ओपनAI का 01 मॉडल अभी सभी के लिए उपलब्ध नहीं है।
डीपसीक की कुछ विशेष बातें-
- 60 लाख डॉलर में बनाया है डीपसीक ने अपना AI मॉडल।
- इसकी गुणवत्ता काफी अच्छी है और लगत काफी कम।
- यह डीपसीक AI मॉडल गणित, कोडिंग, और सामान्य ज्ञान से जुड़े कामो में काफी उपयोगी है।
- यह डीपसीक AI मॉडल 90-95 प्रतिशत किफायती है और बहुत महंगे हार्डवेयर की जरूरत नहीं है।
- भिन्न-भिन्न समस्याओं और कार्यो को पूरा करने में डीपसीक एआई का स्कोर रेट 92 प्रतिशत रहा है, जबकि चैटGPT -4 का स्कोर 78 प्रतिशत है।
- R1 AI को एनवीडिया की H800 चिप का प्रयोग करके बनाया गया है, जो माध्यम रेंज की चिप है।
- डीपसीक का AI एप डीपसीक की वेबसाइट और एप्पल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है।
- डीपसीक की यह R1 AI सेवा निशुल्क है और एप्पल स्टोर पर सबसे तेजी से डाउनलोड होने वाला एप बन गया है।
एआई की दुनिया में अमेरिकी वर्चस्व को चीन की चुनौती है डीपसीक।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस(AI) तकनीक में अमेरिकी कंपनियों जैसे- ओपनएआई, माइक्रोसोफ्ट, गूगल व मेटा और इनके लिए चिप बनाने वाली कंपनी एनवीडिया का वर्चस्व है।
लेकिन चीन के टेक स्टार्टअप डीपसीक ने अपना नया AI चैटबोट दुनिया के सामने पेश करके अमेरिका के वर्चस्व को चुनौती दी है।
इससे अमेरिका के साथ दुनिया भर के शेयर बाजारों में हलचल मच गई है। इसके साथ ही एआई तकनीक विकसित करने को लेकर अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है।
डीपसीक के एआई चैटबोट को लेकर सभी बाजार इसीलिए भी चिंता में है क्यूंकि, इसको तैयार करने की लागत दूसरे प्रतिद्वंदियों से काफी कम है। और इसका प्रयोग भी किफायती है।
डीपसीक के AI चैटबोट की बढती लोकप्रियता का सबसे अधिक प्रभाव एनवीडिया कंपनी के शेयरों पर दिखा है। सोमवार को इस कंपनी के शेयरों में एक ही दिन में कलगभग 17 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और इसके बाजार पूंजीकरण में करीब 600 अरब करोड़ डॉलर की गिरावट आंकी गई।
सोमवार व मंगलवार को इसका असर भारत की आईटी कंपनियों के शेयरों में भी देखने को मिला।
डोनाल्ड ट्रंप ने डीपसीक को अमेरिकी कंपनियों के लिए बताया चेतावनी।
अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप में हाल ही में कहा कि कम लगत वाली चीनी एआई कंपनी अमेरिकी टेक फर्मो के लिए एक चेतावनी है, क्यूंकि इसके उभार से टेक्नोलोजी शेयरों में भारी गिरावट आई है।
ट्रंप ने कहा कि यह झटका सिलिकॉन वैली के लिए सकारात्मक भी हो सकता है, क्यूंकि यह उसे और अधिक सस्ते में इनोवेशन करने के लिए मजबूर कर सकता है।