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भारत में डिजिटल सेवाएं देने वाली विदेशी ई-गेमिंग, ई-कॉमर्स या इंटरनेट मिडिया से जुडी कंपनियों को अपने ग्राहकों के पर्सनल डाटा को भारत में ही रखने के लिए अब बाध्य नहीं होना पड़ेगा।
अगस्त 2023 में संसद में पारित बिल ‘डिजिटल पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन एक्ट’ के नियमो में कहा गया है कि कंपनियों पर सारे पर्सनल डाटा को भारत में रखने की कोई बाध्यता नहीं है।
और कंपनियों द्वारा भारतीय ग्राहकों के डाटा को किसी अन्य को हस्तांतरित करने वाले नियमो को भी सरल रखा गया है।
सरकार ने इस क़ानून से जुड़े और बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्नों(एफएक्यू) और उनके जवाबो की सूची जारी की गई है, जिसमे बताया गया है कि, कुछ मामलो में भारतीय ग्राहकों के बाहर संरक्षित किये गए डाटा को दूसरो को हस्तांतरित करने पर प्रतिबन्ध है।
किसी व्यक्ति के विशेष तौर पर संरक्षित डाटा को ट्रांसफर करने पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय एक समिति करेगी।
ज्ञात रहे कि भारत में पर्सनल डाटा को संरक्षित रखने से जुड़े मुद्दे लम्बे समय से चल रहे है।
लोगों का कहना है कि डिजिटल कंपनियों को भारत के सारे पर्सनल डाटा को देश में ही रखने के लिए बाध्य किया जाए।
भारत सरकार की ओर से इस मांग को आगे भी बढाया गया था, लेकिन अन्तराष्ट्रीय डिजिटल कंपनियों को ये रास नहीं आया और अमेरिका व कुछ दूसरे विकसित देशो ने भारत के साथ द्विपक्षीय बैठको में इस मामले को उठाया था।
लेकिन इस बिल के पारित होने से अब यह स्पष्ट है कि सरकार इस मामले में कठोर कदम नहीं उठायेगी।
बाताया जा रहा है कि भारत के डिजिटल ईको-सिस्टम को प्रतिस्पर्धी बनायें रखने के लिए सरकार में इसको लेकर आम सहमती बन गई है।
सूचना प्रोद्योगिकी मंत्रालय की ओर से जारी एफएक्यू में ये स्पष्ट किया गया है कि, डिजिटल कंपनियों की छोटी-मोटी गलतियों को लेकर भारी-भरकम जुर्माना लगाने की कोई व्यवस्था नहीं की जा रही है।
किसी कंपनी पर क्या जुर्माना लगाया जायेगा, ये उसकी गलतियों की अवधि, प्रकृति,प्रकार और पुनः गलती ना हो इसके लिए कंपनियों के उठाये गए कदमो के आधार पर तय होगा।
कम्पनियों पर जो भी दंड लगाया जायेगा वो उसकी गलतियों के अनुपात में होगा।
और इस अर्थदंड को हटवाने के लिए भी कंपनियों के पास उक्त समूह के सामने अपील करने का अधिकार होगा।
बताते चले कि जब डीपीडीपी एक्ट पारित करवाने की तैयारी चल रही थी,तब बताया गया था कि इस में इंटरनेट मिडिया कंपनियों पर नियमो के उलंघन के लिए 250 करोड़ रूपये तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान होगा।
डीपीडीपी एक्ट का ड्राफ्ट mygov.in पोर्टल पर उपलब्ध है।
कोई भी व्यक्ति इस एक्ट पर अपनी राय 18 फरवरी 2025 तक दे सकता है।
साभार दैनिक जागरण 06/01/2025