Har Baat Hogi Khaas…
वसंत पंचमी कब है! और क्यूँ मनाई जाती है और कैसे करें पूजा और पढ़ें सरस्वती वंदना।
वसंत पंचमी माघ शुक्ल की पंचमी तिथि को मनाई जाती है।
2025 में पंचमी तिथि 02 फरवरी प्रातः 09:15am को शुरू होगी व 03 फरवरी प्रातः 06:53am तक रहेगी।
चूंकि 03 फरवरी को पंचमी तिथि पर सूर्योदय होगा तो पंचमी उदय तिथि में पूरे दिन मानी जाएगी। अतः 03 फरवरी को ही वसंत पंचमी मनाना श्रेयकर रहेगा।
आदि काल में श्री हरि विष्णु भगवान् ने ब्रहम्मा जी को आदेश दिया की वो एक श्रृष्टि का निर्माण करें। तो विष्णु भगवान् के आदेशानुसार ब्रह्म्मा जी ने अपने ब्रह्म्मांड में एक श्रृष्टि का निर्माण किया।
श्रृष्टि का निर्माण करने के पश्चात ब्रह्म्मा जी श्रृष्टि को देखने गए, तो उनको वो श्रृष्टि नीरस लगी। उस श्रृष्टि में ना ध्वनी थी, ना भाव थे, ना संगीत था। चारो ओर शान्ति छाई हुई थी।
उसी समय ब्रह्म्मा जी ने अपने कमंडल से जल की कुछ बूंदे धरती पर गिराई जिससे एक दिव्य देवी प्रकट हुई, जो स्वेत वस्त्र धारण किये हुए थी, जिनके एक हाथ में वीणा, दुसरे हाथ में पुस्तक, तीसरे हाथ में अक्षय माला और चौथा हाथ वरदान की मुद्रा में था। वो देवी कमल के पुष्प पर विराजमान थी।
ब्रह्म्मा जी ने उन देवी का नाम सरस्वती रखा और उनसे कहाँ ‘हें पुत्री तुम इस नीरस और शांत पृथ्वी को ध्वनी, संगीत, विद्या, भाव और बुद्धि प्रदान करो।’
सरस्वती मां ने ब्रह्म्मा जी के आदेशानुसार अपनी वीणा बजाई जिससे पृथ्वी पर निवास करने वाले सभी प्राणियों में वाणी की शक्ति उत्पन्न हुई। लोग बोलने लगे पक्षी चहचहाने लगे, जीव जन्तुओ में बोलने की क्षमता उत्पन्न हुई, नदियाँ कल-कल करने लगी प्रक्रति में उपस्थित सभी जीवो और वनस्पतियों में संगीत व ध्वनी उत्पन्न हो गई।
सरस्वती मां ने अपनी पुस्तक से ज्ञान और बुद्धि का प्रसार किया और अक्षय माला से ये संगीत,वाणी कभी ना नष्ट होने का वरदान दिया।
जिस दिन ब्रह्म्मा जी ने सरस्वती माता को उत्पन्न किया उस दिन माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि थी और तभी से इस तिथि को वसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है और मां सरस्वती की आराधना की जाती है, ताकि हमारे ऊपर सरस्वती मां की कृपा रहे और बुद्धि,विद्या और संगीत की तरंगे हमारे भीतर सचेत रहें।
प्रातः काल उठ कर स्नान आदि से निवृत हो कर पीले वस्त्र धारण करें।
मां सरस्वती के आगे धूप-दीप करें और उनको पीलो या स्वेत पुष्प अर्पित करें।
घर में कोई मीठा पीला व्यंजन बनाए जैसे- बेसन का हलवा,मीठे पीले चावल, बेसन के लड्डू या ने कोई भी एनी वस्तु। और उसका भोग मां सरस्वती को लगाएं और आस पड़ोस में उसे बांटे फिर स्वयं ग्रहण करें।
सरस्वती वंदना गाये और उनसे प्रार्थना करें की सरस्वती मां आप को विद्या और बुद्धि सदैव प्रदान करती रहें।